Happy Durga Ashtami Wishes Images SMS Puja Vidhi in Hindi

By | October 6, 2016

Hindus all over India are in a very joyous mood because the nine-night long Navratri (Navarathri) competition, to be celebrated to worship deity Durga, can endwise the tenth day of Ashwina shukla paksha, per the Hindu calendar. Durga Ashtami (Durgashtami), additionally called Maha Ashtami (Mahashtami), is widely known on the eighth day of Durga Puja celebrations. it’s one among the foremost necessary days of Durga Puja. Best messages, wishes, image greetings to be shared on Vijayadashmi. Devotees additionally observe quick throughout the day and special prayers are going to be conducted in Hindu deity temples.
Nine kinds of Hindu deity are going to be idolized throughout Durja Puja celebrations and therefore the competition marks an endwise Vijayadashmi day, that falls on 22 Oct this year. Latest and new Durga Ashtami SMS or text messages collection on Paperpksms.com/sms. We have complete type of Durga Ashtami SMS, happy Durga Ashtami SMS, short and cute Durga Ashtami SMS , greetings messages & quotes etc.

Happy Durga Ashtami Wishes

Ashirwad bado ka, pyar dosto ka duaen sabki, karuna Maa Ki Durga Puja ki hardik shubhkamnaey.
Happy Durga Ashtami

Pahle Maa Ki Puja,Sab Kuchh Uske Baad, Aapke Saath Sada Rahe Maa Ka Aashirwad.
Happy Durga Ashtami

Maa Durga ke Aashirwad se aapke man ki har muraad poori ho. Aap Ache Kam Ki aur bade, apne ghar walo ka Naam Roshan Kare. Shubh Mahanavami.
Happy Durga Ashtami

Pahle Maa Ki Puja,Sab Kuchh Uske Baad, Aapke Saath Sada Rahe Maa Ka Aashirwad.
Happy Durga Ashtami

Maa Durga Ke Aashirwad Se Aapke Man Ki Har Muraad Poori Ho. Shubh Mahanavami.
Happy Durga Ashtami

Durga Ashtami Images

Durga Ashtami SMS

Maa Durga Teri Jai Ho! Mahishasur Mardini Teri Jai Ho!! Rakt Beej Nashini Teri Jai Ho!!!
Happy Durga Ashtami

“SOSTHI” Te Thak Notun Chhoa “SAPTAMI” Hok Sisir Dhoa Anjali Dao “ASHTAMI” Te Adda Jamuk “NAVAMI” Te “DASHMI” Te Hok Misti Mukh Pujo Tomar Khub Jomuk
Happy Durga Ashtami..

Kya mangu mein maa se mujhe hai sab kuch mila Arey khushkismat hoon mein jo mujhe Durga Ashtami ke roop mein Maa Durga ki aaradhna krne ka moka mila Aapka chehre per muskan rhe itni Ke Khushiyon ki na rhe koi kami Meri taraf se aapko or aapke pariwar ko Mubarak ho Durga Ashtami.

Aapka chehre per muskan rhe itni Ke Khushiyon ki na rhe koi kami Meri taraf se aapko or aapke pariwar ko
Mubarak ho Durga Ashtami.

Durga Maa Sab Pe Apni Kirpa Banayi Rakhe. Jai Mata Di
Happy Durga Ashtami

Durga Ashtami Puja Vidhi in Hindi

शक्ति के लिए देवी आराधना की सुगमता का कारण मां की करुणा, दया, स्नेह का भाव किसी भी भक्त पर सहज ही हो जाता है। ये कभी भी अपने बच्चे (भक्त) को किसी भी तरह से अक्षम या दुखी नहीं देख सकती है। उनका आशीर्वाद भी इस तरह मिलता है, जिससे साधक को किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती है। वह स्वयं सर्वशक्तिमान हो जाता है।

इनकी प्रसन्नता के लिए कभी भी उपासना की जा सकती है, क्योंकि शास्त्राज्ञा में चंडी हवन के लिए किसी भी मुहूर्त की अनिवार्यता नहीं है। नवरात्रि में इस आराधना का विशेष महत्व है। इस समय के तप का फल कई गुना व शीघ्र मिलता है। इस फल के कारण ही इसे कामदूधा काल भी कहा जाता है। देवी या देवता की प्रसन्नता के लिए पंचांग साधन का प्रयोग करना चाहिए। पंचांग साधन में पटल, पद्धति, कवच, सहस्त्रनाम और स्रोत हैं। पटल का शरीर, पद्धति को शिर, कवच को नेत्र, सहस्त्रनाम को मुख तथा स्रोत को जिह्वा कहा जाता है।

इन सब की साधना से साधक देव तुल्य हो जाता है। सहस्त्रनाम में देवी के एक हजार नामों की सूची है। इसमें उनके गुण हैं व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। इन नामों से हवन करने का भी विधान है। इसके अंतर्गत नाम के पश्चात नमः लगाकर स्वाहा लगाया जाता है।

हवन की सामग्री के अनुसार उस फल की प्राप्ति होती है। सर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है। सहस्त्रार्चन के लिए देवी की सहस्त्र नामावली जो कि बाजार में आसानी से मिल जाती है कि आवश्यकता पड़ती है। इस नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर भी देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार होना चाहिए।

अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है। यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।

अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करना चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य लगाना चाहिए। दीपक इस तरह होना चाहिए कि पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहे। अर्चनकर्ता को स्नानादि आदि से शुद्ध होकर धुले कपड़े पहनकर मौन रहकर अर्चन करना चाहिए।

इस साधना काल में आसन पर बैठना चाहिए तथा पूर्ण होने के पूर्व उसका त्याग किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहिए। अर्चन के उपयोग में प्रयुक्त सामग्री अर्चन उपरांत किसी साधन, ब्राह्मण, मंदिर में देना चाहिए। कुंकुम से भी अर्चन किए जा सकते हैं। इसमें नमः के पश्चात बहुत थोड़ा कुंकुम देवी पर अनामिका-मध्यमा व अंगूठे का उपयोग करके चुटकी से चढ़ाना चाहिए।

बाद में उस कुंकुम से स्वयं को या मित्र भक्तों को तिलक के लिए प्रसाद के रूप में दे सकते हैं। सहस्त्रार्चन नवरात्र काल में एक बार कम से कम अवश्य करना चाहिए। इस अर्चन में आपकी आराध्य देवी का अर्चन अधिक लाभकारी है। अर्चन प्रयोग बहुत प्रभावशाली, सात्विक व सिद्धिदायक होने से इसे पूर्ण श्रद्धा व विश्वास से करना चाहिए।

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