Aja Ekadashi 2016 Date, Story, Vrat Katha in Hindi

By | August 24, 2016

Ekadashi could be a sacred day, occurring double a month within the Hindu calendar – on the 11th day of the brilliant half – known as Shukla Paksha and on the eleventh of the dark half known as Vad or avatar Paksha. It’s determined as a quick day by several Hindus, particularly for vaishnavites, whorshippers of Lord Vishnu. Throughout Ekadashi, an arid quick is good. But those unable to quick might take liquids, or if required Phalhaari foods. Once observing a quick on ekadashi day as a results of a vow or would like, one should stay up that night and worship Lord Hindu deity, additionally as quick. Aja, or Annada Ekadasi, is determined throughout the waning section of moon (Krishna Paksha) within the month of Bhadrapad in North india. The corresponding amount in alternative regions is that the krishna Paksha of Shravan month. Aja Ekadasi Vrat Katha was narrated to Yudhishtira by Lord krishna. The story of Annada Ekadashi is related to the renowned king Harischandra. King Harischandra was renowned for his honesty and honesty. Once Sage Vashista praised the honesty of Raja Harischandra however Sage Vishwamitra wasn’t able to settle for it and he decides to check King Harischandra. Vishwamitra vows to prove that Harischandra conjointly lies.

Aja Ekadashi 2016

As a results of Vishwamitra’s tests, King Harischandra had to relinquish up his kingdom and family and had to require refuge in Kashi. He becomes a skilled worker in Kashi. However ne’er lies. He perpetually upheld honesty and correct code of conduct.

Aja Ekadashi 2016 Vrat Katha

One day the nice sage Guatama met King Harischandra and therefore the king narrated his unhappy tale to him. Sage religious mystic suggested King Harischandra to look at Aja Ekadasi that has the ability to get rid of all sins.

कुंतीपुत्र युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! भाद्रपद कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए।

मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम अजा है। यह सब प्रकार के समस्त पापों का नाश करने वाली है। जो मनुष्य इस दिन भगवान ऋषिकेश की पूजा करता है उसको वैकुंठ की प्राप्ति अवश्य होती है। अब आप इसकी कथा सुनिए।

प्राचीनकाल में हरिशचंद्र नामक एक चक्रवर्ती राजा राज्य करता था। उसने किसी कर्म के वशीभूत होकर अपना सारा राज्य व धन त्याग दिया, साथ ही अपनी स्त्री, पुत्र तथा स्वयं को बेच दिया।

वह राजा चांडाल का दास बनकर सत्य को धारण करता हुआ मृतकों का वस्त्र ग्रहण करता रहा। मगर किसी प्रकार से सत्य से विचलित नहीं हुआ। कई बार राजा चिंता के समुद्र में डूबकर अपने मन में विचार करने लगता कि मैं कहाँ जाऊँ, क्या करूँ, जिससे मेरा उद्धार हो।

इस प्रकार राजा को कई वर्ष बीत गए। एक दिन राजा इसी चिंता में बैठा हुआ था कि गौतम ऋषि आ गए। राजा ने उन्हें देखकर प्रणाम किया और अपनी सारी दु:खभरी कहानी कह सुनाई। यह बात सुनकर गौतम ऋषि कहने लगे कि राजन तुम्हारे भाग्य से आज से सात दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा नाम की एकादशी आएगी, तुम विधिपूर्वक उसका व्रत करो।

गौतम ऋषि ने कहा कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से तुम्हारे समस्त पाप नष्ट हो जाएँगे। इस प्रकार राजा से कहकर गौतम ऋषि उसी समय अंतर्ध्यान हो गए। राजा ने उनके कथनानुसार एकादशी आने पर विधिपूर्वक व्रत व जागरण किया। उस व्रत के प्रभाव से राजा के समस्त पाप नष्ट हो गए।

स्वर्ग से बाजे बजने लगे और पुष्पों की वर्षा होने लगी। उसने अपने मृतक पुत्र को जीवित और अपनी स्त्री को वस्त्र तथा आभूषणों से युक्त देखा। व्रत के प्रभाव से राजा को पुन: राज्य मिल गया। अंत में वह अपने परिवार सहित स्वर्ग को गया।

हे राजन! यह सब अजा एकादशी के प्रभाव से ही हुआ। अत: जो मनुष्य यत्न के साथ विधिपूर्वक इस व्रत को करते हुए रात्रि जागरण करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट होकर अंत में वे स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं। इस एकादशी की कथा के श्रवण मात्र से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

The King determined Aja Ekadasi and continued his firm religion in honesty. Soon Sage Vishwamitra accepts his defeat and restores the dominion, half his power and every one the glory to Harischandra. By the ability of observant Aja Ekadasi, the King conjointly got here his married person and his dead son became alive. King Harischandra dominated the dominion for many years and at last got Moksha and reached the Vaikunta all with the influence of observant Aja Ekadashi.

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